कैसे बचें चमकी बुखार से

क्या है चमकी बुखार ?

ये एक प्रकार का वायरस है जो सरीर में पुहंच कर सीदा तोर पर दिमाग पर असर करता है। इस लिए इसे दिमागी बुखार बी कहा जाता है।

चमकी बुखार के वायरस के प्रबाव से बच्चों में पानी और हाइपोग्लाइसीमिया यानी शुगर की कमी पाई गयी है। चमकी बुखार का मेडिकल नाम अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) हैै।

नीचे दिए गए प्रश्न के उत्तर  आपके लिए अच्छी जानकारी साबित हो सकते है चमकी बुखार के लिए  इसलिए धियान से पड़े।

1.अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) होता क्या है?

Ans :- अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी AES एक प्रकार का वायरस है जो  शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम को  प्रभावित करता है।ये वायरस दिमाग मे सूजन पैदा कर देता है जिस से सरीर अपंग बी हो सकता है।

2.चमकी बुखार का कारण क्या है ?

चमकी बुखार की वजह का पता अब भी नहीं लग पाया  हैं। इस को लेकर अलग अलग मत है ।बैक्टीरिया या फंगस बी एक कारण हो सकता है।और कुछ रिसर्च में जो पता लगा है उसके हिसाब से नीचे दिए गये कुछ तथ्य है।

1.गर्मी

2.गंदगी

3.कुपोषण

4.लीची

डॉक्टर भीषण गर्मी को भी एक कारण मानते है। कई जानकारों का मानना है कि गर्मी,गंदगी और कुपोषण इस वायरस के फैलने की अहम वजहें हैं

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लीची में कुदरती रूप से पाए जाने वाले पदार्थ hypoglycin A जो  शरीर में फैटी ऐसिड मेटाबॉलिज़म को रोकता हैं। जिस कारण ब्लड शुगर की मात्रा  सरीर में कम हो जाती है। इस लिए जब हम खाली पेट लीची का सेवन करते है तो हमारे खून में शुगर की मात्रा कम हो जाती है जिस कारण कई बार  हमारे  दिमाग  की नससो में सूजन  शुरू हो जाती हैं जिस कारण दौरे पड़ने लगते हैं।

3.चमकी बुखार के क्या लक्षण है ?

  • तेज बुखार  रहना,
  • सरीर में अकडन होना,
  • कमजोरी महसूस होना,
  • कई बार मरीज़ बेहोस हो जाता है,
  • सरीर का सुन हो जाना चोंटी काटने पर बी सरीर का हरकत न करना

4. इस वायरस की चपेट में आने का खतरा किन लोगों को ज़्यादा होता है?

  • भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने वाले लोगो पर इस वायरस का असर ज्यादा होता है।
  • 6 साल तक के बच्चों को इस वायरस का असर ज्यादा होता है क्यों कि उनमे रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक छमता कम होती है।

5. चमकी बुखार हो जाए तो क्या करे ?

  • तेज बुखार होने पर सरीर को गीले कपड़े से साफ करे 
  • बच्‍चे नेे अगर कपड़े पहने हैै तो उत्तर देे ओर जितना हो सके दााई जाा बााई ओर करवट देे
  • मुंह से लार आ  रहा हो तो उसे साफ कपड़े से पोछें,
  • बच्‍चों को ORS का घोल पिलाते रहें।
  • बेहोशी में बच्चे को खुले ओर हवादार सथान पर लिटाएं।
  • चमकी बुखार की हालत  में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर ले जाएं।

6. चमकी बुखार हो जाए तो क्‍या नही  करना चाहिए ?

  • खाली पेट लीची ना दे
  • बच्‍चे को गर्म कपड़ों में न डखे
  • बच्‍चे की गर्दन को टेड़ा  न रखें।
  • चमकी बुखार होने पर  मरीज़ के बिस्‍तर पर न बैठे ओर ध्‍यान रखें की मरीज के पास सोरसराबा न हो

7. चमकी बुखार में  उपचार व सावधानियां क्या हो

  • अगर बच्चे चमकी बुखार के लक्षण दिखें तो बच्चे को धूप में न जाने दे।
  • बच्‍चों को दिन में 2-3 बार नहलाये
  • बच्चो को ORS. ओर नींबू-पानी में चीनी मिलाकर  पिलाएं।
  • रात को  बच्‍चों को खाली पेट न सोने दे।


अब तक  इस वायरस का पूरी तरह से उपचार नही है । फिर बी  बचाओ के लिए सुरक्षित और असरदार टीके ज़रूर हैं. टीके के अलावा अगर आप कुछ सावधानियां बरतें तो चमकी  बुुुखार से बचा जा सकता है।

 

कैसे पता करे कि ये बुखार चमकी बुखार है

पहले तेज बुखार के साथ

शरीर में अकड़न  होनेे लगती है। शरीर के नसों  में रुकावट आने लगती है फिर मानसिक तनाव महसूस होता है कई बार बच्चा बेहोश हो जाता है ।दौरे बी पड़ते है।

अगर टाइम पर इलाज न मिले तो मरीज़ की मौत हो जाती है। आमतौर पर यह बीमारी गर्मियो में  देखने को मिलती है।

इस लेख का मुख्य निचोड़ इस प्रकार है।

चमकी बुखार होने पर बच्चे को धूप और गर्मी से बचाकर रखें। हेल्थी खाना खिलाएं और शरीर में पानी की कमी न होने दें।

खाली पेट लीची का सेवन न करे । बच्चे को चक्कर आएं या कमजोरी महसूस हो तो उसे फ़ौरन ग्लूकोज या चीनी घोलकर दें। 

बच्चों को खराब  फल न दे
खाने से पहले हाथ वाश करे
पानी साफ रखे
बच्चों के नाखून पर धयान दे
गंदगीभरे इलाकों से दूरी बना के रहे
बच्चों को पोसटीक  खाना दे ।

बच्चों को थोड़ी देर में ORL देते  रहें ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो

किसी भी प्रकार  के बुखार को नजरअंदाज न करें। बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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